Tuesday, July 24, 2007

ना छेड़ो मेरे गम को इस तरह ,
एक चिंगारी अभी बाक़ी है।

जख्म तो भर गया है मगर,
ये दाग अभी बाक़ी है।

फूलों का काँटों से वास्ता इतना,
जब तक ये पराग अभी बाक़ी है

न कर गम ए दोस्त!बहारों का,
जख्म पुराने है दर्द अभी बाक़ी है।

ज़िन्दगी का जाम तड़क कर टूट गया,
मौत की हंसी अभी बाक़ी है।

ए दोस्त !दामन भरा रहे तेरा फूले से,
यही दुआ अकेली अभी बाकी है........

पूनम अग्रवाल.......

4 comments:

उन्मुक्त said...

अच्छी कवितायें हैं

Sharad Agrawal said...

poonamji aapkaa jaisaa naam vaissa hi aapkaa kaam.Poonam ke chand jaisi aapki kavitayen hain.Aap Sharad Poonam ke chand kee tarah
chamken aur aage badhe. yahee mere kaamnaa hai.

अनूप शुक्ल said...

अच्छा लिखा है। लिखती रहें।

Dinesh said...

Poonamji,
You are indeed very sensitive and it seems always thinking deep. That's great. You write wonderfully good. On my request please change your gear from reverse to forward and see the miracle.
I whole heartedly wish you success in your career and in your life.
regards
Dinesh