
नारी.....
ईश्वर की अनूठी रचना हूँ मै
हाँ ! नारी हूँ मैं .........
कभी जन्मी कभी अजन्मी हूँ मैं ,
कभी ख़ुशी कभी मातम हूँ मैं .
कभी छाँव कभी धूप हूँ मैं,
कभी एक में अनेक रूप हूँ मैं.
कभी बेटी बन महकती हूँ मैं,
कभी बहन बन चहकती हूँ मैं .
कभी साजन की मीत हूँ मैं ,
कभी मितवा की प्रीत हूँ मैं .
कभी ममता की मूरत हूँ मैं ,
कभी अहिल्या,सीता की सूरत हूँ मैं .
कभी मोम सी कोमल पिंघलती हूँ मैं,
कभी चट्टान सी अडिग रहती हूँ मैं .
कभी अपने ही अश्रु पीती हूँ मैं,
कभी स्वरचित दुनिया में जीती हूँ मैं .
ईश्वर की अनूठी रचना हूँ मै,
हाँ ! नारी हूँ मै .....
पूनम अग्रवाल .....


13 comments:
बहुत सुन्दर रचना।
Lmbi bimari ke baad aap sabko padhne ka avsar mila...Bahut khubsurat rachna hai naari par bahut2 badhai
Very Nice....Amazing description...Really touching...:)...
Very Nice...touching...really nice description...
Very Nice...touching...really nice description...
EXCELLENT. TOUCHING
बहुत खूब, बड़ी प्यारी रचना है
वाह ! नारी होने पर सहसा गर्व होने लगा....बहुत ही प्रभावपूर्ण रचना !!!!
very nice poem poonam....
your profile is interesting....
i too am sharing the same interests...
seeing poetry in art work and art in poems..
following u so will be in touch...
great luck...
anu
नारी सच में इश्वर की रचित रचना ही तो है ... बहुत खूब ...
बहुर सुन्दर अभिव्यक्ति --------बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर
आपका सब कविता बहुत ही दिल को छूता है ..मेरा भी कविता को कृपया पढाना ..मैं भी नया नया लेखक हूँ www.ShabbirKumar.co.cc
Post a Comment