Sunday, July 25, 2010

शार्टकट...


मैं मलिन नदी ,


शकुंतला की अठखेलियों को


करीब से देखा है मैंने ,


'भारत' ने जिससे पाया


अपना नाम उस भरत को


स्पर्श किया है मैंने ।


तब वेग था मेरे मन में ,


धैर्य था मेरे तन में ।


समय बीता -


आज में त्रस्त हूँ ,


तन मन से ध्वस्त हूँ।


सूख गया है तन मेरा,


टूट गया है मन मेरा ।


मेरे उस और बसे


लोग आज भी


इस और आते है ।


रोंद कर सभी मुझे


निकल जाते है ।


उनके लिए मैं कुछ भी नहीं ,


सिर्फ एक "शोर्ट कट " हूँ ।


पूनम अग्रवाल ...



27 comments:

वन्दना said...

बहुत ही गहन अभिव्यक्ति।
कल (26/7/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

M VERMA said...

शानदार अभिव्यक्ति

राज भाटिय़ा said...

अति सुंदर अभिव्यक्ति

Parul said...

ek asadharan kriti..amazing!

अमिताभ मीत said...

बहुत ख़ूब !

Razi Shahab said...

shandaar....behtareen

Dr. shyam gupta said...

सुन्दर अभिव्यक्ति,दूरन्देशी संदेश-युत.

शरद कोकास said...
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हरकीरत ' हीर' said...

उनके लिए मैं कुछ भी नहीं ,

सिर्फ एक "शोर्ट कट " हूँ ।


"शार्टकट..." का अच्छा उपयोग किया है आपने .....!!

DARSHITA said...

EXCELLENT

www.darshita.wordpress.com
www.darshitabshah.blogspot.com
www.loveguru999.blogspot.com

Dr.Bhawna said...

गहन अभिव्यक्ति.. बहुत२ बधाई

भूतनाथ said...

bahut gahari....pyaari....sacchi aur marmik......

KK Yadava said...

सार्थक रचना...सशक्त प्रस्तुति...बधाई.
__________________
'शब्द सृजन की ओर' में 'साहित्य की अनुपम दीप शिखा : अमृता प्रीतम" (आज जन्म-तिथि पर)

BrijmohanShrivastava said...

आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

BrijmohanShrivastava said...

लिखना क्यों बन्द कर दिया अन्य ब्लाग बनालिया क्या

MD. QAMARUDDIN said...

salaam apki is shaandaar abhivyakti par.

MD. QAMARUDDIN said...
This comment has been removed by a blog administrator.
जितेन्द्र ‘जौहर’ Jitendra Jauhar said...

पूनम जी,
नमस्कारम्‌!
आपने इस मुक्तछंद कविता के माध्यम से नदी की ‘तरल’ पीड़ा को ‘सरल’ अभिव्यक्ति दी है...बधाई!

ध्यान दिलाना चाहूँगा कि आपसे अनवधानतावश निम्न पंक्तियों में ‘ओर’ के स्थान पर ‘और’ टाइप हो गया है, यदि इसे सुधारकर पुनः पोस्ट कर दें तो अच्छा रहेगा-

मेरे उस और बसे
लोग आज भी
इस और आते है ।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

अरे वाह | बहुत सुन्दर कविता .. पूरी की पूरी लॉन्ग / लेंथ बेहतरीन .. नदी का दर्द ..एक शोर्टकट समझने का बहुत खूब

somali said...

bahut khoob...

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, said...

सुब्दर बहुत अच्छा लिखा है बहुत ही गहरा मर्म हैं और वैसी ही कविता..

कई जिस्म और एक आह!!!

Amrita Tanmay said...

Sundar likha hai

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

gahan anubhootiyon se man ki peeda ko abhivyakti deti sunder kavita.
dr.bhoopendra
rewa
mp

somali said...

bahut gahan abhivyakti

Ramakant Singh said...

SO NICE AND BEAUTIFUL FEELING WITH TOUCHING EMOTION.IT HAPPES AND IT WILL BE ALWAYS I FEEL.
YOU CAN SAY THIS IS FATE.
MAY BE IT IS MY PERSONAL OPINION OR VIEW.

Ramakant Singh said...

SO NICE AND BEAUTIFUL FEELING WITH TOUCHING EMOTION.IT HAPPES AND IT WILL BE ALWAYS I FEEL.
YOU CAN SAY THIS IS FATE.
MAY BE IT IS MY PERSONAL OPINION OR VIEW.

rani.cssoni@gmail.com said...

man ko chhu gai nari veri beautiful