Thursday, December 11, 2008

कुछ शेरो- शायेरी


आसमां के नजारों में तुम्हे पाया है,
चमन के सितारों में तुम्हे पाया है।
अफ़साने कुछ इस कदर बदले मेरे,
जिधर देखू उधर तुम्हे ही पाया है॥

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तसव्वुर में भी अश्क उभरे है जब कभी,
पलकों से मेरी उन्हें तुमने चुरा लिया।
यादों के गहरे साए ने घेरा है जब कभी,
सदा देकर तुमने मुझको बुला लिया॥

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अब और क्या मांगूं मैं खुदा से,
तेरा प्यार मिला दुनिया मिल गयी।
सदा साथ तेरा युही बना रहे,
मांगने को यही दूआ हमे मिल गयी॥

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तुम्हे गैरों से कब फुर्सत ,
हम अपने गम से कब खाली ।
चलो अब हो गया मिलना,
न तुम खाली न हम खाली।

पूनम अग्रवाल .......

24 comments:

rahul kumar said...

चलो अब हो गया मिलना,
न तुम खाली न हम खाली।

bahut khooob. milna ho to bahaane darmiya nhi hote..

rahul kumar said...
This comment has been removed by a blog administrator.
पशुपति शर्मा said...

kam se kam shero shayree karne kee firsat to hai aapke paas.

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब.एक से बढ कर एक
धन्यवाद

अक्षय-मन said...

bahut hi accha laga padna......
aapke blog par siway khushi ke....
aur sundar ehsason ke alawa mil bhi kya sakta hai......
dil se jo likhte ho aap..
to sidhe dil mei jata hai....

Dr.Bhawna said...

तसव्वुर में भी अश्क उभरे है जब कभी,
पलकों से मेरी उन्हें तुमने चुरा लिया।
is trha ka payar mile to jindgi safal..or aisa hota bhi ha ..bahut khub likha aapne sabhi bahut ache han...

विक्रांत बेशर्मा said...

तुम्हे गैरों से कब फुर्सत ,
हम अपने गम से कब खाली ।
चलो अब हो गया मिलना,
न तुम खाली न हम खाली।

बहुत खूब !!!!!!!

jayaka said...

आपका काव्य संग्रह बहुत ही अच्छा लगा!... सभी कविताएं चित्त वेधक है!.... धन्यवाद!

पुरुषोत्तम कुमार said...

बहुत अच्छी रचना है।

bahadur patel said...

poonam ji achchha likha hai aapane. badhai.

muskan said...

ab aur kya mangu mai khuda se... bahut khub poonamji

Harsh pandey said...

aapki yah post bahut lajawab rahi
thanks

Harsh pandey said...

bahut sundar hai yah post
thanks

Shashwat Shekhar said...

"तसव्वुर में भी अश्क उभरे है जब कभी,
पलकों से मेरी उन्हें तुमने चुरा लिया।"

कहने वाला बात को कितने सुंदर ढंग से पेश कर सकता है, इन पंक्तियों से यही झलक रहा है |

शिवराज गूजर. said...

आसमां के नजारों में तुम्हे पाया है,
चमन के सितारों में तुम्हे पाया है।
अफ़साने कुछ इस कदर बदले मेरे,
जिधर देखू उधर तुम्हे ही पाया है॥
bahut badiya. achhe sher hain.
mere blog (meridayari.blogspot.com)par bhi aayen.

मीत said...

अब और क्या मांगूं मैं खुदा से,
तेरा प्यार मिला दुनिया मिल गयी।
सदा साथ तेरा युही बना रहे,
मांगने को यही दूआ हमे मिल गयी॥

बहुत अच्छा लिखती हैं...
मुझे दिलासा देने के लिए बहुत शुक्रिया....
वैसे इस ज़माने में कौन किसे दिलासा देता है...
मुझे नयी मंजिल की तलाश रहेगी...
---मीत

www.जीवन के अनुभव said...

वाह क्या बात है........
हर बात दिल के बहुत करीब है. आपकी की रचना मैं एक अलग ही आनंद है.

आकाश: said...

बेहद खूबसूरत रचना है... आप की लिखावट मे बहुत गहराई है.

आकाश

manoj dwivedi said...

chalo ab ho gaya milana
na tum khali na hum khali...
sachmuch sansar aise hi to chal raha hai...apki kalam me jadu hai.

BrijmohanShrivastava said...

कल्पना में भी आंसू नहीं आने दिया और न यादों को पारेशान करने दिया /अतुलनीय कल्पना

RIYA said...

Kavitaaon ke saath sher-o-shaayari ka samanvay bahut khoobsurat hai. Good keep it up.

अनुपम अग्रवाल said...

कहीं पर सुना था .आप की लाइनें पढ़कर याद आया ;
सब कुछ खुदा से मांग लिया तुझको मांग कर
उठते नहीं हैं हाथ मेरे इस दुआ के बाद

रंजना said...

वाह ! बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति...

Vijay Kumar Sappatti said...

बहुत ही अच्छी नज़्म .. शब्द बोल रहे है खुद अपनी कहानी ...बधाई

आभार
विजय
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कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html