Wednesday, December 19, 2007

अख्स


एक चिडिया नन्ही सी
लेकर छोटी सी आशा
सुनहरी सी धूप मे
नारंगी गगन के तले
नन्हें से सपने पले
बेखबर बेखौफ होकर
चल पड़ी भरने उडान
तैरती हुई मंद पवन में
निहारती सुन्दर धरती को
अकेली गुनगुनाती हुई
सुख से मुस्काती हुई
नही था शौक उसका
सबसे ऊँची उडान भरुंगी
ऊँची इमारत पर चधूगी
तैरती हुई मंद पवन में
थक जायगी जब -
कही भी उतर जायेगी
ठिकाना जहाँ पायेगी
बीते कुछ पल गाते हुए
सुख से भरमाते हुए -
यकायक डोर आ छू गयी
पंख उसके पसर गए
मंद पवन में बसर गए
धरती पर वो बिखर गयी
आशाये उसकी फिसल गयी
आँखे थी उसकी नम
दिल में था गम-
सोच रही है बिखरी हुई
डोर से छितरी हुई
क्या था कसूर मेरा ?
क्यों हाल हुआ तेरा ?
खून का कतरा न था
पर था दोष किसका-
शायद कही डोर का
डोर वाला है बेखबर
दोष है हवा के झोके का ....

कई अख्स उभर आते है
चिडिया में उतर जाते है
सोचती हूँ कई बार-
एक अक्स कही मेरा तो नही.........

पूनम अग्रवाल.......

8 comments:

परमजीत बाली said...

पूनम जी, बहुत सुन्दर रचना है।आप की कविता में पूरा जीवन दर्शन छुपा है।

कई अख्स उभर आते है
चिडिया में उतर जाते है
सोचती हूँ कई बार-
एक अक्स कही मेरा तो नही.........

Keerti Vaidya said...

great..so sweet

Me with my solitude said...

too many hopes and too many struuggles...........a little bit of of sweet,a little bit of sour.........
fly as high as you can.......against the air......
there are always obstacles.......but who cares
this is your hope,your way............dont be disappointed......
you can fly higher...........and higher and.............

again a good one.........

Dr. RAMJI GIRI said...

कई अख्स उभर आते है
चिडिया में उतर जाते है
सोचती हूँ कई बार-
एक अक्स कही मेरा तो नही.........

चिडिया का सुन्दर प्रतीकात्मक प्रयोग किया है .साधुवाद.

Manish said...

vyakul mann ki vyatha kya. shabdo se byan hogi
rahe na hum, chalo ye mana, per khawahishe to sada hongi

I would like to invite you in www.khawahish.com

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

अत्यंत सुंदर भाव और उतनी ही सुन्दर कृति|

Abhijit said...

Prateek ka bahut sundar evam sashakt prayog. Is kavita ke liye badhai.

Viksit Khanna said...

Really nice creation...but i will request you to have more happy and cheerful endings...still its a really nice one.