Tuesday, April 29, 2008

अंश


जब एक माँ अपनी नाजों से पली बेटी को उसके सपनो के राजकुमार के साथ विदा करती है। उस समय जो एहसास ,जो ख्याल मेरे मन को भिगो गए- शायद हरेक की ममता इसी तरेह उमड़ पड़ती होगी ........

ये रचना सिर्फ मेरी बिटिया के लिए ......

समाई थी सदा से
वो मुझमें ...
एक अंश के तरह॥
एहसास है एक
अलगाव का
पिंघल रहा है ...
क्यों आज मेरी
आँखों में ...
ख्याल आते गए
बहुत से...
आकर चले गए
खुश हूँ मैं ...
इसलिए की
अंश मेरा
खुश है......
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ख्यालो की तपिश से
पिंघल रही है
बरफ आँख की...
रिश्ता कोई हाथों से
फिसल रहा
हो जैसे...

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत खूबसूरत भाव हैं.

Anonymous said...

The way you have expressed the feelings of a mother...is really touching...beautiful words(Aadhe to samajh hi nai aaye - B2)...amazing poem...we really liked it...viki and B2.

Misha said...
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