Sunday, August 5, 2007

अब कभी न हंस पाएंगे ....

न कर ख्वाहिश मुझसे तू फिर उस शाम की।
अब वो अश आर कभी सुनाये ना जायेंगे ।

ए दोस्त! पहले ही एहसान बहुत हैं मुझपर,
मुझसे दुआ को अब हाथ उठाये न जायेंगे।

दिल की दुनिया में शिवाले बनाने की कमी है,
मेरे लब पे वो अफ़साने न कभी बिखर पायेंगे।

जिन्दगी तो मेरी बस खिजा बनकर रह गयी ,
अब अपने नजरे करम का नजराना न करा पाएंगे।

गम लेकर खुशियो को बाँट दिया है हमने ,
हर जगह रुस्वां हुये अब कभी न हंस पायेंगे.......

2 comments:

अनूप शुक्ला said...

अच्छा है। आप हंसने की कोशिश तो करिये॥

Dinesh said...

dear Poonamji
You are working hard. Your emotions and your poetry is praiseworthy, but I wish you to develop positive mental attitude towards life and see it is beautiful and write your poems with positive mindset. I firmly beleive you will be able to ignite several minds with enthusiasm and hope in the life of mankind. You will not only laugh but you will make the whole world laugh with you.
Wishing you the best.
Dr.Dinesh Nagpal